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mahabharat 1.74.121: दुष्यंतने भी अपनी पत्नी शकुन्तलाका यथोचित आदर किया और उसे उपदेश देते हुए कहा -॥121॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  1.74.121 
तां चैव भार्यां दुष्यन्त: पूजयामास धर्मत:।
अब्रवीच्चैव तां राजा सान्त्वपूर्वमिदं वच:॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
दुष्यंतने भी अपनी पत्नी शकुन्तलाका यथोचित आदर किया और उसे उपदेश देते हुए कहा -॥121॥
 
Dushyant also treated his wife Shakuntala with due respect and advised her saying -॥ 121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)