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mahabharat 1.74.12: स्त्रियों का अपने भाइयों के साथ बहुत दिनों तक रहना अच्छा नहीं है। इससे उनकी कीर्ति, शील और सतीत्व नष्ट हो जाता है। अतः उसे तुरन्त पति के घर भेज दो।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.74.12 
नारीणां चिरवासो हि बान्धवेषु न रोचते।
कीर्तिचारित्रधर्मघ्नस्तस्मान्नयत मा चिरम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियों का अपने भाइयों के साथ बहुत दिनों तक रहना अच्छा नहीं है। इससे उनकी कीर्ति, शील और सतीत्व नष्ट हो जाता है। अतः उसे तुरन्त पति के घर भेज दो।॥12॥
 
‘It is not good for women to stay with their brothers for a long time. It destroys their reputation, modesty and chastity. Therefore, send her to her husband's house immediately.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)