Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.119: तत्पश्चात् महाराज दुष्यंत ने अपने पुत्र के लिए बड़े हर्ष और प्रेम के साथ (शास्त्रों और कुल की परम्परा के अनुसार) उपनयन संस्कार आदि सभी संस्कार और अनुष्ठान सम्पन्न किये, जो एक पिता को करने चाहिए। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततस्तस्य तदा राजा पितृकर्माणि सर्वश:।
कारयामास मुदित: प्रीतिमानात्मजस्य ह॥ ११९॥
अनुवाद
तत्पश्चात् महाराज दुष्यंत ने अपने पुत्र के लिए बड़े हर्ष और प्रेम के साथ (शास्त्रों और कुल की परम्परा के अनुसार) उपनयन संस्कार आदि सभी संस्कार और अनुष्ठान सम्पन्न किये, जो एक पिता को करने चाहिए।
Thereafter Maharaja Dushyant performed all the rites and ceremonies that a father should perform, such as the Upanayana ceremony etc., for his son with great joy and love (in accordance with the scriptures and the tradition of the family).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥