Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.118: वैशम्पायनजी कहते हैं - 'भरत! इस प्रकार देवदूत के वचनों से बालक की पवित्रता सिद्ध करके राजा दुष्यंत ने हर्ष और प्रसन्नता में डूबकर उस समय अपने पुत्र को स्वीकार कर लिया। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'भरत! इस प्रकार देवदूत के वचनों से बालक की पवित्रता सिद्ध करके राजा दुष्यंत ने हर्ष और प्रसन्नता में डूबकर उस समय अपने पुत्र को स्वीकार कर लिया।
Vaishmpayana says, 'Bharata! Having thus proved the purity of the child by the words of the angel, King Dushyant, immersed in joy and happiness, accepted his son at that time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥