Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.117-118h: 'मैं भी अपने इस पुत्र को इसी रूप में जानता हूँ। यदि मैंने इसे केवल शकुन्तला के आग्रह पर ही स्वीकार किया होता, तो सबको इसमें संदेह होता और यह बालक पवित्र न माना जाता।'॥117 1/2॥ | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मैं भी अपने इस पुत्र को इसी रूप में जानता हूँ। यदि मैंने इसे केवल शकुन्तला के आग्रह पर ही स्वीकार किया होता, तो सबको इसमें संदेह होता और यह बालक पवित्र न माना जाता।'॥117 1/2॥
'I too know this son of mine in this form. If I had accepted him only on Shakuntala's insistence, then everyone would have doubted this and this child would not have been considered pure.'॥ 117 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥