श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 110-112
 
 
श्लोक  1.74.110-112 
भस्त्रा माता पितु: पुत्रो येन जात: स एव स:॥ ११०॥
भरस्व पुत्रं दुष्यन्त मावमंस्था: शकुन्तलाम्।
(सर्वेभ्यो ह्यङ्गमङ्गेभ्य: साक्षादुत्पद्यते सुत:।
आत्मा चैष सुतो नाम तथैव तव पौरव॥
आहितं ह्यात्मनाऽऽत्मानं परिरक्ष इमं सुतम्।
अनन्यां स्वां प्रतीक्षस्व मावमंस्था: शकुन्तलाम्॥
स्त्रिय: पवित्रमतुलमेतद् दुष्यन्त धर्मत:।
मासि मासि रजो ह्यासां दुष्कृतान्यपकर्षति॥ )
रेतोधा: पुत्र उन्नयति नरदेव यमक्षयात्॥ १११॥
त्वं चास्य धाता गर्भस्य सत्यमाह शकुन्तला।
जाया जनयते पुत्रमात्मनोऽङ्गं द्विधा कृतम्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
'दुष्यंत! माता तो धौंकनी के समान है। पुत्र तो पिता का ही होता है; क्योंकि जो जिससे उत्पन्न होता है, वह उसी का स्वरूप होता है - इस सिद्धांत के अनुसार पिता पुत्र रूप में जन्म लेता है, अतः दुष्यंत! तुम्हें पुत्र का पालन करना चाहिए। शकुन्तला का अनादर न करो। पौरव! पुत्र तुम्हारा अपना शरीर है। वह पिता के समस्त अंगों से उत्पन्न होता है। वास्तव में वह तुम्हारी ही आत्मा है, जो पुत्र नाम से प्रसिद्ध है। इसी प्रकार तुम्हारा पुत्र भी ऐसा ही है। तुम्हें इस आत्मारूपी पुत्र की रक्षा करनी चाहिए, जिसे तुमने गर्भ में रखा है। शकुन्तला तुम्हारी पत्नी है, जो तुमसे विशेष स्नेह करती है। उसे इसी दृष्टि से देखो! उसका अनादर न करो। दुष्यंत! स्त्रियाँ अद्वितीय एवं पवित्र वस्तु हैं, यह धर्म ने स्वीकार किया है। उनमें प्रति मास होने वाला मासिक धर्म उनके समस्त दोषों को दूर कर देता है। हे पुरुषों के स्वामी! वीर्य का आधान करने वाला पिता ही पुत्र बनता है और वह अपने पूर्वजों को यमलोक से छुड़ाता है। तुमने ही इस बालक को गर्भ में धारण किया था। शकुन्तला सत्य कह रही है। पत्नी अपने पति के ही शरीर से पुत्र को जन्म देती है जो दो भागों में विभक्त हो जाता है। 110-112.
 
‘Dushyant! Mother is only like a bellows. Son belongs to the father only; because whosoever is born from whom, he is the form of that person – according to this principle, father is born in the form of son, so Dushyant! You should take care of the son. Do not disrespect Shakuntala. Paurava! Son is your own body. He is born from all the body parts of the father. In reality, he is your own soul known by the name of son. Similarly, your son is also like this. You should protect this son, who is the form of soul, whom you have placed in the womb. Shakuntala is your wife who has special affection for you. Look at her from this point of view! Do not disrespect her. Dushyant! Women are unique and sacred things, this is accepted by religion. The menstruation that happens in them every month removes all their defects. O Lord of men! The father who transfuses semen becomes the son and he rescues his ancestors from the world of Yama. You were the one who conceived this child. Shakuntala is telling the truth. The wife gives birth to a son from her husband's own body which is divided into two parts. 110-112.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)