Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.108: महाराज दुष्यंत, मैं आपसे एक बात कह सकता हूँ, आपके सहयोग के बिना भी मेरा यह पुत्र चार समुद्रों से घिरी हुई तथा हिमालय के मुकुट से सुशोभित सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन करेगा। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वामृतेऽपि हि दुष्यन्त शैलराजावतंसकाम्।
चतुरन्तामिमामुर्वीं पुत्रो मे पालयिष्यति॥ १०८॥
अनुवाद
महाराज दुष्यंत, मैं आपसे एक बात कह सकता हूँ, आपके सहयोग के बिना भी मेरा यह पुत्र चार समुद्रों से घिरी हुई तथा हिमालय के मुकुट से सुशोभित सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन करेगा।
Maharaja Dushyant, I can tell you one thing, even without your cooperation, this son of mine will rule the entire earth surrounded by the four oceans and adorned with the crown of the Himalayas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥