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mahabharat 1.74.10-11: तब उस बालक के बल को जानकर कण्व ने अपने शिष्यों से कहा - 'तुम लोग शीघ्र ही मेरी समस्त शुभ गुणों से संपन्न पुत्री शकुन्तला और उसके पुत्र को इस घर से उसके पति के घर ले जाओ।॥ 10-11॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  1.74.10-11 
तस्य तद् बलमाज्ञाय कण्व: शिष्यानुवाच ह॥ १०॥
शकुन्तलामिमां शीघ्रं सहपुत्रामितो गृहात् ।
भर्तु: प्रापयतागारं सर्वलक्षणपूजिताम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तब उस बालक के बल को जानकर कण्व ने अपने शिष्यों से कहा - 'तुम लोग शीघ्र ही मेरी समस्त शुभ गुणों से संपन्न पुत्री शकुन्तला और उसके पुत्र को इस घर से उसके पति के घर ले जाओ।॥ 10-11॥
 
Then, realising the strength of the boy, Kanva said to his disciples, 'You should quickly take my daughter Shakuntala, who is blessed with all the auspicious qualities, and her son, from this house to her husband's house.॥ 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)