Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.73.d8-d10: विरक्त शकुन्तला से ऐसा कहकर राजा दुष्यंत ने उसे गोद में उठा लिया और मुस्कुराते हुए उसकी ओर देखने लगे। देवी शकुन्तला राजा की परिक्रमा करती हुई खड़ी थीं। उस समय उन्होंने उन्हें हृदय से लगा लिया। शकुन्तला के मुख से आँसू बहने लगे और वह राजा के चरणों पर गिर पड़ी। राजा ने देवी शकुन्तला को पुनः उठाया और बार-बार कहा - 'राजकुमारी! चिन्ता न करो। मैं अपने सतीत्व की शपथ खाकर कहता हूँ कि मैं तुम्हें अवश्य बुलाऊँगा।' | mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(एवमुक्त्वा स राजर्षिस्तामनिन्दितगामिनीम्।
सम्परिष्वज्य बाहुभ्यां स्मितपूर्वमुदैक्षत॥
प्रदक्षिणीकृतां देवीं राजा सम्परिषस्वजे।
शकुन्तला ह्यश्रुमुखी पपात नृपपादयो:॥
तां देवीं पुनरुत्थाप्य मा शुचेति पुन: पुन:।
शपेयं सुकृतेनैव प्रापयिष्ये नृपात्मजे॥ )
अनुवाद
विरक्त शकुन्तला से ऐसा कहकर राजा दुष्यंत ने उसे गोद में उठा लिया और मुस्कुराते हुए उसकी ओर देखने लगे। देवी शकुन्तला राजा की परिक्रमा करती हुई खड़ी थीं। उस समय उन्होंने उन्हें हृदय से लगा लिया। शकुन्तला के मुख से आँसू बहने लगे और वह राजा के चरणों पर गिर पड़ी। राजा ने देवी शकुन्तला को पुनः उठाया और बार-बार कहा - 'राजकुमारी! चिन्ता न करो। मैं अपने सतीत्व की शपथ खाकर कहता हूँ कि मैं तुम्हें अवश्य बुलाऊँगा।'
Saying this to the uninhibited Shakuntala, King Dushyant took her in his arms and looked at her smilingly. Goddess Shakuntala was standing circling the king. At that time, he embraced her. Tears started flowing from Shakuntala's face and she fell at the king's feet. The king picked up Goddess Shakuntala again and said repeatedly - 'Princess! Don't worry. I swear by my virtue that I will definitely call you.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥