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mahabharat 1.73.d14: कण्व बोले- पुत्री! तुम दीर्घायु होकर ही मर्यादा में रहोगी। अब तुम पहले जैसी फुर्तीली नहीं रहोगी। शुभ! मुझे सब कुछ स्पष्ट बताओ; डरो मत।   |   mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  1.73.d14 
कण्व उवाच
सव्रीडैव च दीर्घायु: पुरेव भविता न च।
वृत्तं कथय रम्भोरु मा त्रासं च प्रकल्पय॥
 
 
अनुवाद
कण्व बोले- पुत्री! तुम दीर्घायु होकर ही मर्यादा में रहोगी। अब तुम पहले जैसी फुर्तीली नहीं रहोगी। शुभ! मुझे सब कुछ स्पष्ट बताओ; डरो मत।
 
Kanva said— Daughter! You will live long only by remaining modest. Now you will not be as agile as before. Shubh! Tell me everything clearly; do not be afraid.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)