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शकुन्तलोवाच
फलाहारो गतो राजन् पिता मे इत आश्रमात्।
मुहूर्तं सम्प्रतीक्षस्व स मां तुभ्यं प्रदास्यति॥ ५॥
अनुवाद
शकुन्तला बोली - हे राजन! मेरे पिता कण्व फल लाने के लिए इस आश्रम से बाहर गए हैं। कृपया कुछ क्षण प्रतीक्षा करें। वे मुझे आपकी सेवा में समर्पित कर देंगे।
Shakuntala said - O King! My father Kanva has gone out of this hermitage to bring fruits. Please wait for a few moments. He will dedicate me to your service.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥