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mahabharat 1.73.4: कायर! सुन्दर! मुझे गन्धर्व विवाह द्वारा स्वीकार करो। रम्भोरु! विवाहों में गन्धर्व विवाह श्रेष्ठ माना गया है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.73.4 
गान्धर्वेण च मां भीरु विवाहेनैहि सुन्दरि।
विवाहानां हि रम्भोरु गान्धर्व: श्रेष्ठ उच्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कायर! सुन्दर! मुझे गन्धर्व विवाह द्वारा स्वीकार करो। रम्भोरु! विवाहों में गन्धर्व विवाह श्रेष्ठ माना गया है। 4॥
 
Coward! Beautiful! Accept me through Gandharva marriage. Rambhoru! Gandharva marriage is considered to be the best among marriages. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)