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mahabharat 1.73.30: शत्रुओं पर आक्रमण करने वाले उस महाबुद्धिमान सम्राट की सेना सदैव अजेय रहेगी। उसकी उन्नति को कोई नहीं रोक सकेगा।॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.73.30 
परं चाभिप्रयातस्य चक्रं तस्य महात्मन:।
भविष्यत्यप्रतिहतं सततं चक्रवर्तिन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं पर आक्रमण करने वाले उस महाबुद्धिमान सम्राट की सेना सदैव अजेय रहेगी। उसकी उन्नति को कोई नहीं रोक सकेगा।॥30॥
 
‘The army of that great-minded emperor, who attacks his enemies, will always be unstoppable. No one will be able to stop his progress.’॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)