धर्मात्मा च महात्मा च दुष्यन्त: पुरुषोत्तम:।
अभ्यगच्छ: पतिं यत् त्वं भजमानं शकुन्तले॥ २८॥
महात्मा जनिता लोके पुत्रस्तव महाबल:।
य इमां सागरापाङ्गीं कृत्स्नां भोक्ष्यति मेदिनीम्॥ २९॥
अनुवाद
शकुन्तले! महाबली दुष्यंत पुण्यात्मा और कुलीन पुरुष हैं। वे तुम्हें चाहते थे। तुमने योग्य पति का संग किया है; अतः इस लोक में तुम्हारे गर्भ से एक अत्यन्त बलवान और महान पुत्र उत्पन्न होगा, जो समुद्र से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी का उपभोग करेगा॥ 28-29॥
Shakuntale! The great Dushyant is a virtuous and noble man. He wanted you. You have entered into a relationship with a worthy husband; therefore, a very powerful and great son will be born from your womb in this world, who will enjoy the whole earth surrounded by the ocean.॥ 28-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥