Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.73.27: 'क्षत्रिय के लिए गन्धर्व विवाह श्रेष्ठ कहा गया है। यदि स्त्री-पुरुष एक-दूसरे से प्रेम करते हों, तो एकान्त में उनके बीच जो मन्त्ररहित सम्बन्ध स्थापित होता है, उसे गन्धर्व विवाह कहते हैं ॥27॥ | mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षत्रियस्य हि गान्धर्वो विवाह: श्रेष्ठ उच्यते।
सकामाया: सकामेन निर्मन्त्रो रहसि स्मृत:॥ २७॥
अनुवाद
'क्षत्रिय के लिए गन्धर्व विवाह श्रेष्ठ कहा गया है। यदि स्त्री-पुरुष एक-दूसरे से प्रेम करते हों, तो एकान्त में उनके बीच जो मन्त्ररहित सम्बन्ध स्थापित होता है, उसे गन्धर्व विवाह कहते हैं ॥27॥
'Gandharva marriage is said to be best for a Kshatriya. In case both man and woman love each other, the mantraless relationship that is established between them in solitude is called Gandharva marriage. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥