विज्ञायाथ च तां कण्वो दिव्यज्ञानो महातपा:।
उवाच भगवान् प्रीत: पश्यन् दिव्येन चक्षुषा॥ २५॥
अनुवाद
महातपस्वी भगवान कण्व दिव्य ज्ञान से संपन्न थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से शकुन्तला को देखकर उसकी वर्तमान स्थिति जान ली; अतः वे प्रसन्न होकर बोले-॥25॥
The great ascetic Bhagwan Kanva was endowed with divine knowledge. He understood the present condition of Shakuntala by seeing her with his divine sight; hence he became pleased and said-॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥