Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.73.25: महातपस्वी भगवान कण्व दिव्य ज्ञान से संपन्न थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से शकुन्तला को देखकर उसकी वर्तमान स्थिति जान ली; अतः वे प्रसन्न होकर बोले-॥25॥ | mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विज्ञायाथ च तां कण्वो दिव्यज्ञानो महातपा:।
उवाच भगवान् प्रीत: पश्यन् दिव्येन चक्षुषा॥ २५॥
अनुवाद
महातपस्वी भगवान कण्व दिव्य ज्ञान से संपन्न थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से शकुन्तला को देखकर उसकी वर्तमान स्थिति जान ली; अतः वे प्रसन्न होकर बोले-॥25॥
The great ascetic Bhagwan Kanva was endowed with divine knowledge. He understood the present condition of Shakuntala by seeing her with his divine sight; hence he became pleased and said-॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥