श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.73.25 
विज्ञायाथ च तां कण्वो दिव्यज्ञानो महातपा:।
उवाच भगवान् प्रीत: पश्यन् दिव्येन चक्षुषा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी भगवान कण्व दिव्य ज्ञान से संपन्न थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से शकुन्तला को देखकर उसकी वर्तमान स्थिति जान ली; अतः वे प्रसन्न होकर बोले-॥25॥
 
The great ascetic Bhagwan Kanva was endowed with divine knowledge. He understood the present condition of Shakuntala by seeing her with his divine sight; hence he became pleased and said-॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)