श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.73.15 
शकुन्तलोवाच
यदि धर्मपथस्त्वेष यदि चात्मा प्रभुर्मम।
प्रदाने पौरवश्रेष्ठ शृणु मे समयं प्रभो॥ १५॥
 
 
अनुवाद
शकुन्तला बोली - हे पौरव! यदि यह गन्धर्व विवाह धर्ममार्ग है, यदि आत्मा स्वयं को दान करने में समर्थ है, तो मैं इसके लिए तैयार हूँ; किन्तु प्रभु! मेरी एक शर्त है, कृपया उसे सुनिए।
 
Shakuntala said - O great Paurava! If this Gandharva marriage is the path of Dharma, if the soul is capable of donating itself, then I am ready for this; but Lord! I have one condition, please listen to it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)