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mahabharat 1.73.14: अतः हे सुन्दरी! मैं तुम्हें पाने की इच्छा रखता हूँ। तुम भी मुझे पाने की इच्छा करो और गन्धर्व विवाह द्वारा मेरी पत्नी बनो ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.73.14 
सा त्वं मम सकामस्य सकामा वरवर्णिनि।
गान्धर्वेण विवाहेन भार्या भवितुमर्हसि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अतः हे सुन्दरी! मैं तुम्हें पाने की इच्छा रखता हूँ। तुम भी मुझे पाने की इच्छा करो और गन्धर्व विवाह द्वारा मेरी पत्नी बनो ॥14॥
 
Therefore, beautiful girl! I am desirous of getting you. You too should desire to get me and become my wife through Gandharva marriage. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)