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mahabharat 1.73.13: क्षत्रिय जाति के लिए गंधर्व और राक्षस दोनों विवाह धर्मानुकूल हैं। इसलिए तुम्हें इनमें संदेह नहीं करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दोनों विवाह, चाहे एक साथ हों या अलग-अलग, क्षत्रिय के लिए करने योग्य हैं। 13॥   |   mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.73.13 
गान्धर्वराक्षसौ क्षत्रे धर्म्यौ तौ मा विशङ्किथा:।
पृथग् वा यदि वा मिश्रौ कर्तव्यौ नात्र संशय:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय जाति के लिए गंधर्व और राक्षस दोनों विवाह धर्मानुकूल हैं। इसलिए तुम्हें इनमें संदेह नहीं करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दोनों विवाह, चाहे एक साथ हों या अलग-अलग, क्षत्रिय के लिए करने योग्य हैं। 13॥
 
Both Gandharva and Rakshasa marriages are religious for the Kshatriya caste. Therefore you should not doubt about them. There is no doubt that both those marriages, whether together or separately, are worth doing for a Kshatriya. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)