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mahabharat 1.73.12: पैशाच और आसुर विवाह कभी भी स्वीकार्य नहीं हैं। विवाह इसी विधि से होने चाहिए। यही धर्म का मार्ग है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.73.12 
पैशाच आसुरश्चैव न कर्तव्यौ कदाचन।
अनेन विधिना कार्यो धर्मस्यैषा गति: स्मृता॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पैशाच और आसुर विवाह कभी भी स्वीकार्य नहीं हैं। विवाह इसी विधि से होने चाहिए। यही धर्म का मार्ग है॥12॥
 
Paishacha and Asura marriages are never acceptable. Marriages should be done according to this method. This is the path of Dharma.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)