श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.72.17 
एवं दुहितरं विद्धि मम विप्र शकुन्तलाम्।
शकुन्तला च पितरं मन्यते मामनिन्दिता॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! इस प्रकार शकुन्तला मेरी पुत्री है, यह तुम्हें जानना चाहिए। प्रशंसनीय चरित्र वाली शकुन्तला भी मुझे अपना पिता मानती है॥17॥
 
O Brahman! Thus Shakuntala is my daughter, you should know this. Shakuntala, who has a praiseworthy character, also considers me her father.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)