श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.72.15 
शरीरकृत् प्राणदाता यस्य चान्नानि भुञ्जते।
क्रमेणैते त्रयोऽप्युक्ता: पितरो धर्मशासने॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो गर्भाधान द्वारा शरीर की रचना करता है, जो रक्षा करके प्राणों की रक्षा करता है और जिसका अन्न खाया जाता है, ये तीनों व्यक्ति शास्त्रों में क्रमशः पिता कहे गए हैं ॥15॥
 
The one who creates the body by conception, the one who protects the life by giving protection and the one whose food is eaten, these three persons are respectively called father in the scriptures. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)