श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  1.71.d3 
(आश्रमस्याभिगमने किं त्वं कार्यं चिकीर्षसि।
कस्त्वमद्येह सम्प्राप्तो महर्षेराश्रमं शुभम्॥ )
 
 
अनुवाद
"आश्रम में आपके आने का क्या कारण है? आप यहाँ क्या कार्य संपन्न करना चाहते हैं? आपका परिचय क्या है? आप कौन हैं? और आज महर्षि के इस पावन आश्रम में आप किस उद्देश्य से आए हैं?"
 
‘What is the reason for your coming to the ashram? What work do you want to accomplish here? What is your introduction? Who are you? And for what purpose have you come to this auspicious ashram of Maharshi today?’
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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