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mahabharat 1.71.d14-d15: उस समय, 'विश्वामित्र ब्रह्मर्षि वसिष्ठ के शाप से कैसे मुक्त होंगे?' ऐसा सोचकर देवताओं ने उनकी उपेक्षा करके त्रिशंकु के यज्ञ की समस्त सामग्री नष्ट कर दी। किन्तु महाबली एवं तेजस्वी विश्वामित्र ने अन्य यज्ञ सामग्री का निर्माण किया और उन महातपस्वी ने त्रिशंकु को स्वर्ग भेज दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक d14-d15
 
 
श्लोक  1.71.d14-d15 
(ब्रह्मर्षिशापं राजर्षि: कथं मोक्ष्यति कौशिक:।
अवमत्य तदा देवैर्यज्ञाङ्गं तद् विनाशितम्॥
अन्यानि च महातेजा यज्ञाङ्गान्यसृजत् प्रभु:।
निनाय च तदा स्वर्गं त्रिशंकुं स महातपा:॥ )
 
 
अनुवाद
उस समय, 'विश्वामित्र ब्रह्मर्षि वसिष्ठ के शाप से कैसे मुक्त होंगे?' ऐसा सोचकर देवताओं ने उनकी उपेक्षा करके त्रिशंकु के यज्ञ की समस्त सामग्री नष्ट कर दी। किन्तु महाबली एवं तेजस्वी विश्वामित्र ने अन्य यज्ञ सामग्री का निर्माण किया और उन महातपस्वी ने त्रिशंकु को स्वर्ग भेज दिया।
 
At that time, thinking that 'How will Vishwamitra free himself from the curse of Brahmarishi Vasishtha?', the gods ignored them and destroyed all the materials of Trisanku's yagya. But the mighty and illustrious Vishwamitra created other yagya materials and that great ascetic sent Trisanku to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)