Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.71.d12: जिसका स्वभाव भिन्न है, किन्तु जो पुण्यात्मा लोगों के सामने अपना परिचय भिन्न प्रकार से देता है, अर्थात् जो पापी होते हुए भी अपने को पुण्यात्मा कहता है, वह मूर्ख, पाप से आच्छादित, चोर और आत्म-प्रवंचक है। | mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(अन्यथा सन्तमात्मानमन्यथा सत्सु भाषते।
स पापेनावृतो मूर्ख: स्तेन आत्मापहारक:॥ )
अनुवाद
जिसका स्वभाव भिन्न है, किन्तु जो पुण्यात्मा लोगों के सामने अपना परिचय भिन्न प्रकार से देता है, अर्थात् जो पापी होते हुए भी अपने को पुण्यात्मा कहता है, वह मूर्ख, पाप से आच्छादित, चोर और आत्म-प्रवंचक है।
One whose nature is different but who introduces himself in a different way before the virtuous people, i.e. one who, in spite of being a sinner, calls himself a virtuous person, is a fool, covered with sin, a thief and a self-deceiver.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥