श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.71.7 
तामब्रवीत् ततो राजा कन्यां मधुरभाषिणीम्।
दृष्ट्वा चैवानवद्याङ्गीं यथावत् प्रतिपूजित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उसके द्वारा यथायोग्य आतिथ्य स्वीकार करके राजा ने उस सर्वसुन्दरी और मधुरभाषी कन्या की ओर देखकर कहा ॥7॥
 
After accepting the hospitality duly extended by her, the king looked at that all-beautiful and sweet-spoken girl and said. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)