Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.71.42: जब मैं मुनि को रिझाने लगूँ, उस समय वन से सुगन्धित वायु प्रवाहित हो। जब इन्द्र ने 'तथास्तु' कहकर ऐसी व्यवस्था कर दी, तब मेनका विश्वामित्र मुनि के आश्रम में गई। 42॥ | mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब मैं मुनि को रिझाने लगूँ, उस समय वन से सुगन्धित वायु प्रवाहित हो। जब इन्द्र ने 'तथास्तु' कहकर ऐसी व्यवस्था कर दी, तब मेनका विश्वामित्र मुनि के आश्रम में गई। 42॥
When I start wooing the sage, at that time a fragrant breeze should blow from the forest. When Indra made such arrangements by saying 'Athastu', then Menaka went to the ashram of Vishwamitra Muni. 42॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि शकुन्तलोपाख्याने एकसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें शकुन्तलोपाख्यानविषयक इकहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७१॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ श्लोक मिलाकर कुल ५७ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥