Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.71.41: हे प्रभु! जब मैं वहाँ जाकर लीला में लीन हो जाऊँ, तब वायुदेव मेरे वस्त्रों को आवश्यकतानुसार उड़ा दें और आपके आशीर्वाद से प्रेमदेव भी इस कार्य में मेरी सहायता करें॥41॥ | mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कामं तु मे मारुतस्तत्र वास:
प्रक्रीडिताया विवृणोतु देव।
भवेच्च मे मन्मथस्तत्र कार्ये
सहायभूतस्तु तव प्रसादात्॥ ४१॥
अनुवाद
हे प्रभु! जब मैं वहाँ जाकर लीला में लीन हो जाऊँ, तब वायुदेव मेरे वस्त्रों को आवश्यकतानुसार उड़ा दें और आपके आशीर्वाद से प्रेमदेव भी इस कार्य में मेरी सहायता करें॥41॥
O lord! When I go there and immerse myself in the play, then the god of wind may blow away my clothes as per the need and with your blessings may the god of love also help me in this task. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥