Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.71.40: सुरेन्द्र! जब आपने मुझे इस प्रकार वहाँ जाने का आदेश दिया है, तो मैं उस ऋषि के पास कैसे न जाऊँ? किन्तु देवराज! पहले मेरी रक्षा का कोई उपाय सोचिए; जिससे मैं सुरक्षित रह सकूँ और आपके कार्य की सफलता के लिए प्रयत्नशील रह सकूँ। | mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वयैवमुक्ता च कथं समीप-
मृषेर्न गच्छेयमहं सुरेन्द्र।
रक्षां तु मे चिन्तय देवराज
यथा त्वदर्थं रक्षिताहं चरेयम्॥ ४०॥
अनुवाद
सुरेन्द्र! जब आपने मुझे इस प्रकार वहाँ जाने का आदेश दिया है, तो मैं उस ऋषि के पास कैसे न जाऊँ? किन्तु देवराज! पहले मेरी रक्षा का कोई उपाय सोचिए; जिससे मैं सुरक्षित रह सकूँ और आपके कार्य की सफलता के लिए प्रयत्नशील रह सकूँ।
Surendra! How can I not go to that sage when you have ordered me to go there like this? But Devraj! First think of a way to protect me; so that I can remain safe and make efforts for the success of your task.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥