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mahabharat 1.71.38: हे देवश्रेष्ठ! जिनका मुख अग्नि है, जिनके नेत्र सूर्य और चन्द्रमा हैं तथा जिनकी जिह्वा काल है, उन महाप्रतापी मुनि को मेरे समान स्त्री कैसे स्पर्श कर सकती है?॥ 38॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.71.38 
हुताशनमुखं दीप्तं सूर्यचन्द्राक्षितारकम्।
कालजिह्वं सुरश्रेष्ठ कथमस्मद्विधा स्पृशेत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे देवश्रेष्ठ! जिनका मुख अग्नि है, जिनके नेत्र सूर्य और चन्द्रमा हैं तथा जिनकी जिह्वा काल है, उन महाप्रतापी मुनि को मेरे समान स्त्री कैसे स्पर्श कर सकती है?॥ 38॥
 
O best of the gods! How can a woman like me touch that illustrious sage whose face is Agni, whose eyes have the Sun and Moon as the stars, and whose tongue is time?॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)