Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.71.36: वह अपने तेज से सम्पूर्ण लोकों को नष्ट कर सकता है, अपने पैर के प्रहार से पृथ्वी को हिला सकता है, विशाल मेरु पर्वत को छोटा कर सकता है और सम्पूर्ण दिशाओं को तुरन्त उलट सकता है॥ 36॥ | mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह अपने तेज से सम्पूर्ण लोकों को नष्ट कर सकता है, अपने पैर के प्रहार से पृथ्वी को हिला सकता है, विशाल मेरु पर्वत को छोटा कर सकता है और सम्पूर्ण दिशाओं को तुरन्त उलट सकता है॥ 36॥
With his brilliance he can destroy entire worlds, shake the earth with a strike of his foot, make the huge Mount Meru small and can instantly reverse all directions.॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥