Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.71.34: उन्होंने ही क्रोध में आकर परलोक की रचना की तथा नक्षत्रों की सम्पदा से कुपित होकर प्रतिश्रवण आदि नवीन नक्षत्रों की रचना की। ये वही महात्मा हैं जिन्होंने गुरु के शाप से असहाय अवस्था में पड़े राजा त्रिशंकु को शरण दी थी। 34. | mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने ही क्रोध में आकर परलोक की रचना की तथा नक्षत्रों की सम्पदा से कुपित होकर प्रतिश्रवण आदि नवीन नक्षत्रों की रचना की। ये वही महात्मा हैं जिन्होंने गुरु के शाप से असहाय अवस्था में पड़े राजा त्रिशंकु को शरण दी थी। 34.
It was he who, in anger, created the other world and, being annoyed with the wealth of stars, created new stars like Pratishravana etc. He is the same great soul who gave shelter to King Trisanku, who was in a helpless state due to the curse of his Guru. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥