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mahabharat 1.71.32: अकाल समाप्त होने के बाद शक्तिशाली ऋषि अपने आश्रम लौट आये और उन्होंने नदी का नाम परा रखा।   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.71.32 
अतीतकाले दुर्भिक्षे अभ्येत्य पुनराश्रमम्।
मुनि: पारेति नद्या वै नाम चक्रे तदा प्रभु:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अकाल समाप्त होने के बाद शक्तिशाली ऋषि अपने आश्रम लौट आये और उन्होंने नदी का नाम परा रखा।
 
After the famine was over the powerful sage returned to his ashram and named the river Para. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)