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mahabharat 1.71.3: दुष्यंत के ये शब्द सुनकर, देवी लक्ष्मी के समान एक सुंदर कन्या तपसी का वेश धारण करके आश्रम से बाहर आई।   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.71.3 
श्रुत्वाथ तस्य तं शब्दं कन्या श्रीरिव रूपिणी।
निश्चक्रामाश्रमात् तस्मात् तापसीवेषधारिणी॥ ३॥
 
 
अनुवाद
दुष्यंत के ये शब्द सुनकर, देवी लक्ष्मी के समान एक सुंदर कन्या तपसी का वेश धारण करके आश्रम से बाहर आई।
 
Hearing those words of Dushyaanta, a beautiful girl resembling goddess Lakshmi incarnate, came out of the hermitage dressed as a Tapasi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)