Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.71.29-30: ऋषि विश्वामित्र वही पुरुष हैं जिन्होंने भाग्यवान वसिष्ठ ऋषि को उनके प्रिय पुत्रों से सदा के लिए अलग कर दिया; जो क्षत्रिय कुल में उत्पन्न होकर भी तप के बल से ब्राह्मण बन गए; जिन्होंने उनके शौच और स्नान की सुविधा के लिए उस दुर्गम गहरे जल से भरी नदी की रचना की, जिसे संसार के सभी मनुष्य परम पवित्र कौशिकी नदी के नाम से जानते हैं॥ 29-30॥ | mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋषि विश्वामित्र वही पुरुष हैं जिन्होंने भाग्यवान वसिष्ठ ऋषि को उनके प्रिय पुत्रों से सदा के लिए अलग कर दिया; जो क्षत्रिय कुल में उत्पन्न होकर भी तप के बल से ब्राह्मण बन गए; जिन्होंने उनके शौच और स्नान की सुविधा के लिए उस दुर्गम गहरे जल से भरी नदी की रचना की, जिसे संसार के सभी मनुष्य परम पवित्र कौशिकी नदी के नाम से जानते हैं॥ 29-30॥
Sage Vishwamitra is the same person who separated the fortunate sage Vasishtha from his beloved sons forever; who, though born in a Kshatriya family, became a Brahmin by the power of penance; who, for the convenience of his toilet and bath, created that inaccessible river filled with deep water, which is known by all men in the world as the most sacred river Kaushiki.॥ 29-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥