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mahabharat 1.71.27: मेनका बोलीं- हे देवराज! भगवान विश्वामित्र बड़े तेजस्वी और महान तपस्वी हैं। वे बड़े क्रोधी भी हैं। आप भी उनके इस स्वभाव को जानते हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.71.27 
मेनकोवाच
महातेजा: स भगवांस्तथैव च महातपा:।
कोपनश्च तथा ह्येनं जानाति भगवानपि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मेनका बोलीं- हे देवराज! भगवान विश्वामित्र बड़े तेजस्वी और महान तपस्वी हैं। वे बड़े क्रोधी भी हैं। आप भी उनके इस स्वभाव को जानते हैं॥ 27॥
 
Menaka said— O king of gods! Lord Vishwamitra is very radiant and a great ascetic. He is also very short-tempered. You too know this nature of his.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)