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mahabharat 1.71.26: 'वरारोहे! अपने रूप, यौवन, मधुर स्वभाव, हाव-भाव, मृदुल मुस्कान और मधुर वार्तालाप आदि से मुनियों को मोहित कर लो और उन्हें तपस्या से विरत कर दो॥26॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.71.26 
रूपयौवनमाधुर्यचेष्टितस्मितभाषणै:।
लोभयित्वा वरारोहे तपसस्तं निवर्तय॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'वरारोहे! अपने रूप, यौवन, मधुर स्वभाव, हाव-भाव, मृदुल मुस्कान और मधुर वार्तालाप आदि से मुनियों को मोहित कर लो और उन्हें तपस्या से विरत कर दो॥26॥
 
'Vararohe! Enthrall the monks with your beauty, youth, sweet nature, gestures, soft smile and pleasant conversation etc. and make them retire from penance. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)