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mahabharat 1.71.25: अतः तुम ऐसा कुछ करो जिससे वे मुझे मेरे स्थान से हटा न सकें। तुम उनके पास जाओ और उन्हें मोहित करो, उनकी तपस्या में विघ्न डालो और इस प्रकार मेरी विघ्न-निवारण के लिए मुझे उत्तम साधन प्रदान करो॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.71.25 
स मां न च्यावयेत् स्थानात् तं वै गत्वा प्रलोभय।
चर तस्य तपोविघ्नं कुरु मेऽविघ्नमुत्तमम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम ऐसा कुछ करो जिससे वे मुझे मेरे स्थान से हटा न सकें। तुम उनके पास जाओ और उन्हें मोहित करो, उनकी तपस्या में विघ्न डालो और इस प्रकार मेरी विघ्न-निवारण के लिए मुझे उत्तम साधन प्रदान करो॥ 25॥
 
‘Therefore do something so that they cannot dislodge me from my place. You go to them and entice them, create obstacles in their penance and thus provide me with the best means to remove my obstacles.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)