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mahabharat 1.71.24: 'सुन्दरी मेनके! मैं उन्हें तपस्या से विचलित करने का महान कार्य तुम्हारे ऊपर छोड़ता हूँ। विश्वामित्र का हृदय पवित्र है। उन्हें पराजित करना अत्यन्त कठिन है और वे इस समय घोर तपस्या में लीन हैं।॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.71.24 
मेनके तव भारोऽयं विश्वामित्र: सुमध्यमे।
शंसितात्मा सुदुर्धर्ष उग्रे तपसि वर्तते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'सुन्दरी मेनके! मैं उन्हें तपस्या से विचलित करने का महान कार्य तुम्हारे ऊपर छोड़ता हूँ। विश्वामित्र का हृदय पवित्र है। उन्हें पराजित करना अत्यन्त कठिन है और वे इस समय घोर तपस्या में लीन हैं।॥ 24॥
 
'Beautiful girl Menake! I leave this great task of distracting him from his penance on you. Vishwamitra's heart is pure. It is very difficult to defeat him and he is currently engaged in severe penance.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)