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mahabharat 1.71.22-23: मेनके! तुम अप्सराओं में भी परम दिव्य गुणों वाली हो। कल्याणी! मुझ पर कृपा करो और जो मैं तुमसे कहता हूँ, उसे सुनो। सूर्य के समान तेजस्वी वे महातपस्वी विश्वामित्र घोर तपस्या में लगे हुए हैं और मेरे मन को व्याकुल कर रहे हैं॥ 22-23॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  1.71.22-23 
गुणैरप्सरसां दिव्यैर्मेनके त्वं विशिष्यसे।
श्रेयो मे कुरु कल्याणि यत् त्वां वक्ष्यामि तच्छृणु॥ २२॥
असावादित्यसंकाशो विश्वामित्रो महातपा:।
तप्यमानस्तपो घोरं मम कम्पयते मन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मेनके! तुम अप्सराओं में भी परम दिव्य गुणों वाली हो। कल्याणी! मुझ पर कृपा करो और जो मैं तुमसे कहता हूँ, उसे सुनो। सूर्य के समान तेजस्वी वे महातपस्वी विश्वामित्र घोर तपस्या में लगे हुए हैं और मेरे मन को व्याकुल कर रहे हैं॥ 22-23॥
 
‘Menake! You have the most divine qualities of Apsaras. Kalyani! Do me a favour and listen to what I tell you. That great ascetic Vishwamitra, who is as radiant as the Sun, is engaged in severe penance and is making my mind quiver.॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)