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mahabharat 1.71.20: कण्व बोले - बहुत समय पहले की बात है, महर्षि विश्वामित्र घोर तपस्या कर रहे थे। उन्होंने अपनी तपस्या से देवताओं के स्वामी इंद्र को घोर कष्ट में डाल दिया था।   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.71.20 
कण्व उवाच
तप्यमान: किल पुरा विश्वामित्रो महत् तप:।
सुभृशं तापयामास शक्रं सुरगणेश्वरम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कण्व बोले - बहुत समय पहले की बात है, महर्षि विश्वामित्र घोर तपस्या कर रहे थे। उन्होंने अपनी तपस्या से देवताओं के स्वामी इंद्र को घोर कष्ट में डाल दिया था।
 
Kanva said - It happened long ago, Maharishi Vishwamitra was doing a lot of penance. He put the lord of gods Indra in great pain with his penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)