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mahabharat 1.71.2: महर्षि कण्व को न देखकर और आश्रम को सूना पाकर राजा ने सम्पूर्ण वन में गूँजती हुई आवाज से पूछा, “यहाँ कौन है?”॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.71.2 
सोऽपश्यमानस्तमृषिं शून्यं दृष्ट्वा तथाऽऽश्रमम्।
उवाच क इहेत्युच्चैर्वनं संनादयन्निव॥ २॥
 
 
अनुवाद
महर्षि कण्व को न देखकर और आश्रम को सूना पाकर राजा ने सम्पूर्ण वन में गूँजती हुई आवाज से पूछा, “यहाँ कौन है?”॥2॥
 
Not seeing Maharishi Kanva and finding the hermitage deserted, the king asked the voice echoing through the entire forest, “Who is here?”॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)