श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.71.17 
कथं त्वं तस्य दुहिता सम्भूता वरवर्णिनी।
संशयो मे महानत्र तन्मे छेत्तुमिहार्हसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में तुम जैसी सुन्दरी उनकी पुत्री कैसे हो सकती है? इस विषय में मुझे घोर संदेह है। केवल तुम ही मेरे इस संदेह का निवारण कर सकती हो॥ 17॥
 
In such a situation how can a beautiful lady like you be his daughter? I have a grave doubt in this matter. Only you can clear this doubt of mine.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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