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mahabharat 1.71.14: जब राजा ने आश्रम में उससे इस प्रकार पूछा, तब वह कन्या हँसकर उनसे मधुर वचनों में इस प्रकार बोली -॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.71.14 
एवमुक्ता तु सा कन्या तेन राज्ञा तमाश्रमे।
उवाच हसती वाक्यमिदं सुमधुराक्षरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब राजा ने आश्रम में उससे इस प्रकार पूछा, तब वह कन्या हँसकर उनसे मधुर वचनों में इस प्रकार बोली -॥14॥
 
When the king asked her in this manner in the hermitage, the girl smilingly spoke to him in sweet words as follows -॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)