श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.71.12 
का त्वं कस्यासि सुश्रोणि किमर्थं चागता वनम्।
एवंरूपगुणोपेता कुतस्त्वमसि शोभने॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे मनोहर कटि से सुशोभित सुन्दरी! तुम कौन हो? किसकी पुत्री हो? और इस वन में किसलिए आई हो? सुन्दरी! तुमने ऐसा अद्भुत सौन्दर्य और गुण कैसे विकसित किए हैं?॥12॥
 
‘O beautiful lady adorned with a charming waist! Who are you? Whose daughter are you? And why have you come to this forest? Beautiful lady! How have you developed such a wonderful beauty and qualities?॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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