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mahabharat 1.70.34: इस प्रकार नरेश्वर दुष्यंत को आदेश देकर वे नंदनवन के समान सुशोभित उस तपोवन में पहुँचे और भूख-प्यास भूलकर वहाँ उन्हें महान आनंद मिला ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 1.70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.70.34 
तद् वनं नन्दनप्रख्यमासाद्य मनुजेश्वर:।
क्षुत्पिपासे जहौ राजा मुदं चावाप पुष्कलाम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नरेश्वर दुष्यंत को आदेश देकर वे नंदनवन के समान सुशोभित उस तपोवन में पहुँचे और भूख-प्यास भूलकर वहाँ उन्हें महान आनंद मिला ॥34॥
 
Thus ordering Nareshwar Dushyant, he reached that Tapovan, decorated like Nandanvan, and forgot his hunger and thirst. There he found great joy. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)