Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.70.30-32: तत्पश्चात्, कुबेर के चैत्ररथवन के समान सुन्दर उस महान् वन में, उत्तम गुणों से युक्त, शब्दों से जिनकी महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता, तपोधन कण्व नामक कश्यपकुल के महामुनि को देखने के लिए, जहाँ मदमस्त मयूर अपनी वाणी फैला रहे थे, पुरुषोत्तम दुष्यंत प्रवेश कर गए। वहाँ पहुँचकर राजा ने उस तपोवन के तट पर रथ, घोड़े, हाथी और पैदलों से युक्त अपनी चतुरंगिणी सेना को खड़ा करके कहा - 30-32॥ | mahabharat अध्याय 1.70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, कुबेर के चैत्ररथवन के समान सुन्दर उस महान् वन में, उत्तम गुणों से युक्त, शब्दों से जिनकी महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता, तपोधन कण्व नामक कश्यपकुल के महामुनि को देखने के लिए, जहाँ मदमस्त मयूर अपनी वाणी फैला रहे थे, पुरुषोत्तम दुष्यंत प्रवेश कर गए। वहाँ पहुँचकर राजा ने उस तपोवन के तट पर रथ, घोड़े, हाथी और पैदलों से युक्त अपनी चतुरंगिणी सेना को खड़ा करके कहा - 30-32॥
Thereafter, the best of men, Dushyant, entered that great forest, as beautiful as Kubera's Chaitrarathvan, to see Tapodhana Kanva, the great sage of the Kashyap clan, whose glory could not be described by words, full of excellent qualities, where the intoxicated peacocks were spreading their voices. After reaching there, the king stationed his four-armed army consisting of chariots, horses, elephants and footmen on the banks of that Tapovan and said - 30-32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥