श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.70.27 
तस्यास्तीरे भगवत: काश्यपस्य महात्मन:।
आश्रमप्रवरं रम्यं महर्षिगणसेवितम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसके तट पर कश्यप वंशी महात्मा कण्व का सुन्दर एवं उत्कृष्ट आश्रम था। वहाँ महान ऋषियों का समूह निवास करता था॥27॥
 
On its banks was the beautiful and excellent hermitage of Mahatma Kanva, belonging to the Kashyap clan. A group of great sages resided there.॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)