श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.70.25 
सचक्रवाकपुलिनां पुष्पफेनप्रवाहिनीम्।
सकिन्नरगणावासां वानरर्क्षनिषेविताम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसके तटों पर चकवा और चकई मृग विहार करते थे। नदी के जल में बहुत से फूल ऐसे तैर रहे थे मानो वे झाग हों। उसके तटों पर किन्नर रहते थे। बन्दर और भालू भी उस नदी का आनन्द लेते थे॥25॥
 
The Chakva and Chakai were frolicking on its banks. Many flowers were floating in the river water as if they were foam. Kinnars lived on its banks. Monkeys and bears also used to enjoy that river.॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)