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mahabharat 1.70.20: वहाँ अनेक त्यागी तपस्वी, बालखिल्य जैसे ऋषि और अन्य तपस्वी रहते थे। अनेक अग्निहोत्र कक्ष उस आश्रम की शोभा बढ़ा रहे थे। वहाँ इतने फूल गिरे थे कि वह उनके लिए शय्या जैसा लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 1.70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.70.20 
यतिभिर्वालखिल्यैश्च वृतं मुनिगणान्वितम्।
अग्न्यगारैश्च बहुभि: पुष्पसंस्तरसंस्तृतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अनेक त्यागी तपस्वी, बालखिल्य जैसे ऋषि और अन्य तपस्वी रहते थे। अनेक अग्निहोत्र कक्ष उस आश्रम की शोभा बढ़ा रहे थे। वहाँ इतने फूल गिरे थे कि वह उनके लिए शय्या जैसा लग रहा था।
 
Many renunciant ascetics, sages like Balkhilya and other hermits lived there. Numerous Agnihotra rooms were adding to the beauty of that ashram. So many flowers had fallen there that it looked like a bed for them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)